श्री दुर्गा चालीसा – Durga Chalisa in Hindi1 min read

Copy of Purple Smartphone Modern Elegance Technology Gaming Facebook Shops Cover 46 श्री दुर्गा चालीसा - Durga Chalisa in Hindi

उपक्षेप – Introduction 

दुर्गा चालीसा में 40 श्लोक हैं। ये श्लोक चार के एक श्लोक में स्थापित हैं। इस चालीसा को देवी दुर्गा की स्तुति में गाया जाता है। विशेष रूप से दुर्गा पूजा के दौरान, इन भजनों को किसी भी दिन और हर दिन देवी की स्तुति में गाया जा सकता है। देवी दुर्गा के भक्त आमतौर पर दिन के उजाले में उनकी महिमा के लिए गाते हैं। प्रतिदिन जोर से श्री दुर्गा चालीसा पढ़कर दुर्गा माँ के दिव्य आशीर्वाद का आह्वान करें।

Durga Chalisa

दुर्गा चालीसा के बोल – Durga Chalisa Lyrics in Hindi

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूं लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।

नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी।

तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।

परगट भई फाड़कर खम्बा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।

हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।

श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।

दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।

महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावति माता।

भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।

छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।

लांगुर वीर चलत अगवानी॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै।

जाको देख काल डर भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला।

जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।

तिहुंलोक में डंका बाजत॥

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।

रक्तबीज शंखन संहारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।

जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

रूप कराल कालिका धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ संतन पर जब जब।

भई सहाय मातु तुम तब तब॥

अमरपुरी अरु बासव लोका।

तब महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।

तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें।

दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।

जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।

योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।

काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।

काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।

शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।

जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।

दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो।

तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

आशा तृष्णा निपट सतावें।

रिपू मुरख मौही डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी।

सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

करो कृपा हे मातु दयाला।

ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।

जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।

तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥

दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।

सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज जानी।

करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

श्री दुर्गा चालीसा के लाभ – Benefits of Shri Durga Chalisa in Hindi

  • नवरात्रि के दौरान दुर्गा चालीसा पढ़ने को आध्यात्मिक और भावनात्मक जागृति का कारण कहा जाता है
  • अनावश्यक विचारों से छुटकारा पाएं, दुर्गा चालीसा के साथ जो आपको मन की शांति पाने में मदद करेगी
  • बुरी आत्माओं से लड़ने के लिए आपमें सकारात्मक ऊर्जा पैदा करें
  • प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी आपको और आपके परिवार को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए जाना जाता है
  • यह आपको अन्य प्रकार की कठिनाइयों और नुकसानों से बचाने में भी मदद करता है।
  • निराशा, वासना, जुनून जैसी मजबूत भावनाओं पर काबू पाएं
  • यह आपकी खोई हुई सामाजिक स्थिति को पुनः प्राप्त करने में भी आपकी मदद करेगा
  • देवी ईमानदार प्रार्थनाओं के साथ धन, ज्ञान और समृद्धि दिखाती हैं

दुर्गा चालीसा का पाठ करने का उत्तम समय – Best Time To Recite Durga Chalisa in Hindi

कहा जाता है कि नवरात्रि के दौरान दुर्गा चालीसा पढ़ने से पाठकों के आध्यात्मिक और भावनात्मक जागरण का कारण बनता है। यदि आप अनावश्यक नकारात्मक विचारों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो दुर्गा चालीसा पढ़ने से आपको मानसिक शांति प्राप्त करने में मदद मिलेगी। ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा की चालीसा पढ़ने से आप नकारात्मक सोच से दूर रहेंगे।

निष्कर्ष – Conclusion

श्री दुर्गा चालीसा  एक 40-कविता प्रार्थना है और यह माँ दुर्गा को देवी दुर्गा की सुंदरता, लचीलापन, शक्ति, महिमा और साहस का वर्णन और प्रशंसा करने के लिए समर्पित है। भक्तों को अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इसे हर दिन समर्पित रूप से गाना चाहिए।